फ़िदा आप का ये ग़ुलाम आप पर हो / Fida Aap Ka Ye Ghulam Aap Par Ho
मता'-ए-दिल-ओ-जाँ निसार आप पर हो फ़िदा आप का ये ग़ुलाम आप पर हो बड़ी मुद्दतों से ये चाहत है दिल की हों शहर-ए-नबी में, सलाम आप पर हो कभी अश्क-बारी, कभी आह-ओ-ज़ारी ख़ुलूस-ए-मोहब्बत तमाम आप पर हो उहुद का वो मैदाँ, वो ताइफ़ की वादी वो ख़ाक-ए-मदीना निसार आप पर हो ये इक जान क्या गर करोड़ों हों जानें फ़ना, ऐ हबीब-ए-अनाम ! आप पर हो इसी के हैं क़ाबिल मेरे मुस्तफ़ा तो कि क़ुर्बान सारा जहान आप पर हो दर-ए-मुस्तफ़ा पर जो जाओ तो कहना सना-ख़्वाँ का आक़ा सलाम आप पर हो ख़ुदा बिन्त-ए-ताहिर की क़िस्मत में लिख दे हो दीदार उन का कलाम आप पर हो शायर: बिन्त-ए-ताहिर ना'त-ख़्वाँ: यासिर सुहरवर्दी mata'-e-dil-o-jaa.n nisaar aap par ho fida aap ka ye Gulaam aap par ho ba.Di muddato.n se ye chaahat hai dil ki ho.n shahr-e-nabi me.n, salaam aap par ho kabhi ashk-baari, kabhi aah-o-zaari KHuloos-e-mohabbat tamaam aap par ho uhud ka wo maidaa.n, wo taaif ki waadi wo KHaak-e-madina nisaar aap par ho ye ik jaan kya gar karo.Do.n ho.n jaane.n fana, ai habeeb-e-anaam ! aap par ho is...