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फ़िदा आप का ये ग़ुलाम आप पर हो / Fida Aap Ka Ye Ghulam Aap Par Ho

मता'-ए-दिल-ओ-जाँ निसार आप पर हो फ़िदा आप का ये ग़ुलाम आप पर हो बड़ी मुद्दतों से ये चाहत है दिल की हों शहर-ए-नबी में, सलाम आप पर हो कभी अश्क-बारी, कभी आह-ओ-ज़ारी ख़ुलूस-ए-मोहब्बत तमाम आप पर हो उहुद का वो मैदाँ, वो ताइफ़ की वादी वो ख़ाक-ए-मदीना निसार आप पर हो ये इक जान क्या गर करोड़ों हों जानें फ़ना, ऐ हबीब-ए-अनाम ! आप पर हो इसी के हैं क़ाबिल मेरे मुस्तफ़ा तो कि क़ुर्बान सारा जहान आप पर हो दर-ए-मुस्तफ़ा पर जो जाओ तो कहना सना-ख़्वाँ का आक़ा सलाम आप पर हो ख़ुदा बिन्त-ए-ताहिर की क़िस्मत में लिख दे हो दीदार उन का कलाम आप पर हो शायर: बिन्त-ए-ताहिर ना'त-ख़्वाँ: यासिर सुहरवर्दी mata'-e-dil-o-jaa.n nisaar aap par ho fida aap ka ye Gulaam aap par ho ba.Di muddato.n se ye chaahat hai dil ki ho.n shahr-e-nabi me.n, salaam aap par ho kabhi ashk-baari, kabhi aah-o-zaari KHuloos-e-mohabbat tamaam aap par ho uhud ka wo maidaa.n, wo taaif ki waadi wo KHaak-e-madina nisaar aap par ho ye ik jaan kya gar karo.Do.n ho.n jaane.n fana, ai habeeb-e-anaam ! aap par ho is...

हरा गुंबद जो देखोगे ज़माना भूल जाओगे / Hara Gumbad Jo Dekhoge Zamana Bhool Jaoge

हरा गुंबद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे अगर तयबा को जाओगे, तो आना भूल जाओगे न इतराओ ज़ियादा, चाँद-तारो ! अपनी रंगत पर मेरे आक़ा को देखोगे चमकना भूल जाओगे अगर तुम ग़ौर से मेरे नबी की ना'त सुन लोगे मेरा दा'वा है तुम गाना बजाना भूल जाओगे तुम्हारे सामने होगा कभी जब गुंबद-ए-ख़ज़रा नज़र जम जाएगी उस पर, हटाना भूल जाओगे हदीस-ए-मुस्तफ़ा पर तुम जो हो जाओ 'अमल-पैरा क़सम अल्लाह की, माँ को सताना भूल जाओगे नबी के पाक जल्वे को अगर तुम ख़्वाब में देखो क़सम रब की, चराग़ों को जलाना भूल जाओगे कभी पहली नज़र जब गुंबद-ए-ख़ज़रा पे जाएगी वो लम्हें तुम ज़माने को बताना भूल जाओगे ना'त-ख़्वाँ: यासिर सोहरवर्दी ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी हुदा सिस्टर्स लाइबा फ़ातिमा हरा गुंबद जो देखोगे, ज़माना भूल जाओगे मदीना जाओगे इक बार, आना भूल जाओगे न इतराओ ज़ियादा, चाँद-तारो ! अपनी रंगत पर रुख़-ए-सरवर के आगे जगमगाना भूल जाओगे नबी के दर की सूखी रोटियों में ऐसी लज़्ज़त है शहंशाहों के दर का आब-ओ-दाना भूल जाओगे जो तुम 'क़ुल इन्नमा' की, मुन्किरो ! तफ़्सीर को पढ़ लो तो अपने जैसा तुम उन को बताना भूल जाओगे हद...

डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं / Darte Hain Na Jhukte Hain, Wo Mere Sahaaba Hain

डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं हर हाल में लड़ते हैं, वो मेरे सहाबा हैं डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं रातों को मुसल्ले पर और दिन को सर-ए-मैदां दुश्मन से निमटते हैं, वो मेरे सहाबा हैं डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं इस आरज़ी दुनिया को ख़ातिर में नहीं लाते उक़्बा को समझते हैं, वो मेरे सहाबा हैं डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं जो रब की मोहब्बत में अव्वल शब की दुल्हन को छोड़ के चलते हैं, वो मेरे सहाबा हैं डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं नातख्वां: यासिर सोहरवर्दी